देश में हर महीने स्पॉट बिलिंग(तुरंत बिल ) लागु होने के बाद स्थायी शुल्क की ज़ादा वसूली हो रही है , उपभोग्ताओ की मीटर की रीडिंग 30 दिन के बजाय 25 दिन में ही ली जा रही है , पर स्थायी षुल्क पुरे 30 दिन का लिया जा रहा है।
स्थाई शुल्क स्लैब के अनुसार 50 यूनिट तक 100रु है , पर 51 यूनिट होते ही स्थायी शुल्क 200रु हो जाता है यानि बिल में 50 फीसदी राशि स्थायी षुल्क की ही हो जाती है ,सरकारी बिजली वितरण कम्पनियो में में घरेलु उपभोक्ताओ से बिजली उपभोग के आधार पर स्थायी षुल्क की वसूली हो रही है
कई बार उपभोगता को ये समाज नहीं आता की कंपनी किस आधार पर स्थायी शुल्क लेती है , कई उपभोगता विभाग पर नियम विरुद्ध बिल भेजने के आरोप लगे है , इस में कंपनी का कहना है की कई बार गलती हो जाती है। इस के समाधान के लिए उपभोगता बिल पर अंकित टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज करवा सकते है।
इस तरह निकाले अपना स्थायी शुल्क
उपभोगता पर लगने वाले स्थायी शुल्क वित्य वर्ष के अनुसार सालभर की औसत यूनिट के आधार पर लगता है , इसके लिए 12 महीने की यूनिट का योग कर के उसे 12 से भाग देने पर सालभर की औसत यूनिट निकल आएगी। उपभोगता की औसत यूनिट जिस स्लैब में आती है उस के अनुसार उस पर स्थायी शुल्क लगाया जाता है। गत वर्ष की औसत यूनिट के आधार पर ही आगामी सत्र के स्थायी शुल्क को लगाया जाता है।
कितनी यूनिट पर कितना स्थायी शुल्क (घरेलु)
50 यूनिट तक -125
51 से 150 यूनिट तक -230
151 से 300 यूनिट तक -275
301 से 500 यूनिट तक -345
500 से ज़ादा यूनिट पर -400
यहाँ करे शिकायत
विधुत संबंधी परेशानी होने पर उपभोगता इसकी शिकायत विभाग के टोल फ्री नंबर पर कर सकते है , वहा टोल फ्री नंबर बिल पर अंकित किये जाते है।

